कोटा । राजस्थान विधुत प्रसारण निगम में हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में एसीबी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 3 पूर्व अभियंताओं सहित चार आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही 50-50 हजार रुपये का आर्थिक दंड से दंडित भी किया। बुधवार को आरो‎पियों को एसीबी कोर्ट में पेश ‎किया गया था, जहां से कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सभी को पांच साल की सजा सुनाई और जेल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने तत्कालीन राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के इंजीनियर रामसेवक मिश्रा, ओम प्रकाश, अशोक दुबे को 5-5 साल की सजा और 50-50 हजार के अर्थदण्ड से दंडित किया, जबकि ठेका फर्म कम्पनी के ठेकेदार को 5 साल की सजा व 25 हजार के अर्थदण्ड से दंडित किया है। इन पर सवाई माधोपुर में खण्डार व भाड़ौती जीएसएस निर्माण का अधूरा कार्य होने पर भी ठेका फर्म को 56 लाख रुपये का अधिक भुगतान का आरोप ‎था।
लोक अभियोजक अशोक कुमार जोशी ने बताया कि सवाई माधोपुर के खंडार व भाडोती में साल 2007 में जीएसएस के निर्माण कार्य के यूबी इंजीनियरिंग लिमिटेड दिल्ली व मेसर्स एंजेलिक इंटरनेशनल लिमिटेड नई दिल्ली को दिया गया था। उस दौरान केवी सर्विस स्टेशन में हुए निर्माण कार्य से प्रथम से चतुर्थ रनिंग बिल का भुगतान तो वर्क ऑर्डर के अनुसार किया गया, लेकिन पांचवें व अंतिम रनिंग बिल का भुगतान बिना वर्क ऑर्डर जारी किए ही कर दिया गया। मामले में तत्कालीन एडिशनल एसपी देवेंद्र शर्मा ने सत्यापन किया और मामले की जांच की। जांच में सामने आया ‎कि ओमप्रकाश मीणा सहायक अभियंता राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम (सिविल गुणवत्ता नियंत्रण), राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम, बीकानेर ,अशोक दुबे सहायक अभियंता (सिविल गुणवत्ता नियंत्रण) हाल राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम, बाड़मेर, रामसेवक मिश्रा,तत्कालीन अधिशाषी अभियंता, व संतोष सिंह प्रतिनिधि मेसर्स यूबी इंजीनियरिंग लिमिटेड दिल्ली ने मिली भगत कर राज्य सरकार को राजस्व हानि पहुंचाई। मामले में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि जनतांत्रिक प्रशासन में किसी भी व्यवस्था को संचालित करने का दायित्व लोक सेवक पर होता है। अगर लोकसेवक भ्रष्ट हो जाए तो राष्ट्र की जड़े कमजोर हो जाती है, जिसका असर राष्ट्र के विकास पर पड़ता है।