कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कोटा जिले में एक ही दिन में एक थानाधिकारी समेत चार अन्य पुलिसकर्मियों और दो अधिवक्ताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किये हैं। इनमें अंता थाने के थानाधिकारी, 1 एएसआई, 1 निलंबित एएसआई ,1 हेड कॉस्टेबल, 1 कांस्टेबल और दलाली करने वाले दो अधिवक्ताओं के खिलाफ शिकंजा कसा गया है।भ्रष्टाचार के मामले में एक साथ इतने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है। 
  ब्यूरो की एडिशनल एसपी ठाकुर चंद्रशील ने बताया कि पहला प्रकरण बारां जिले के अंता थाने के सीआई उमेश मेनारिया, कांस्टेबल रवि, निलंबित एएसआई ब्रजबिहारी लाल और दलाल की भूमिका निभा रहे अधिवक्ता भगवान दाधीच के खिलाफ दर्ज किया गया है। गत नवंबर में जमीन पर अवैध कब्जे को छुड़ाने की एवज में 50 हजार रिश्वत मांगने के मामले में यह एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं दूसरी एफआईआर में कोटा के विज्ञान नगर थाने के हजारी लाल, हैड कांस्टेबल राम प्रताप और दलाल की भूमिका निभा रहे अधिवक्ता बाबूलाल मेघवाल के खिलाफ एक मामले में रिश्वत मांगने के मामले में दर्ज की गई है। इन आरोपियों ने जनवरी 2019 में हॉस्टल खाली करवाने के दर्ज मामले में एफआर लगाने व समझौता करवाने की एवज में डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
वहीं तीसरा मामला केशवरायपाटन के एसबीआई बैंक के संविदाकर्मी अमित मीणा के खिलाफ केसीसी का लोन दिलाने की एवज में रिश्वत मांगने का है। इसमें भी भ्रष्टाचार की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपी बैंककर्मी ने अगस्त 2020 में केसीसी लोन व नो-ड्यूज दिलाने की एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। तीनों मामलों में सभी आरोपियों के खिलाफ एसीबी के पास रिश्वत मांगने के पुख्ता सबूत होने पर इनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपी शातिर किस्म के होने के कारण ट्रेप की कार्रवाई संभव नहीं हो सकी। लेकिन मोबाइल पर हुई रिश्वत मांगने की वार्ता सहित अन्य सबूतों के आधार पर एसीबी ने सभी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।