छपरा। छपरा के बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी का प्रयास अब रंग लाने लगा है। मेट्रोपोलिटन शहरों की ही तरह छपरा शहर में भी पाइप लाइन गैस से घरों के चूल्हे जलेंगे। इसका जिम्मा इंडियन आयल को मिला है। इंडियन आयल प्रथम चरण में शहर के बीस हजार घरों में फिलहाल यह सुविधा उपलब्ध करा रही है। इसके लिए कंपनी ने शहर के विभिन्न मुहल्लों का चयन भी किया है। इन मुहल्लों में फिलहाल पाइप बिछाने से लेकर कनेक्शन बुकिंग का कार्य भी शुरू कर चुकी है। जानकारी के मुताबिक अगले पांच-महीनों बाद जून-जुलाई से छपरा शहर के विभिन्न मुहल्लों में पाइपलाइन गैस (पीएनजी) पहुंचाने की योजना है। इसके लिए पेट्रोलियम कंपनी इंडियन आयल ने तीन आउटसोर्सिंग कंपनी को काम पर लगा रखा है। इस योजना के लिए कंपनी ने बुकिंग भी शुरू कर दी है। व्यस्ततम नगरपालिका चौक सहित अन्य जगहों पर कंपनी ने इसके लिए  स्टाल लगाया है जिसमें ग्राहकों के लिए दो तरह की सुविधा उपलब्ध कराई है। एक डायफ्राग्म मीटर तथा दूसरा स्मार्ट मीटर की सुविधा है। इसके लिए क्रमशः 6618 तथा 9618 शुल्क लिए जाएंगे, जिसमें से 6500 तथा 9500 रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपाजिट है। इस राशि को ग्राहक किश्तों में भी चुका सकते है जो उनके मासिक रिचार्ज में जुड़ा रहेगा। पाइपलाइन गैस के उपयोग से प्रत्येक परिवार को हर महीने 350 से 400 की बचत होगी। फिलहाल एक परिवार को एक माह के गैस को रिफिल कराने में 800 से 900 रूपये खर्च करने पड़ रहे है। प्रथम चरण में छपरा शहर के प्रभुनाथनगर, दहियांवा, उमानगर, साढ़ा, नेवाजी टोला, भगवान बाजार, बैंक कालोनी, प्रताप नगर, रेलवे कालोनी, साधनापुरी, मौना, दर्शन नगर, सलेमपुर, साहेबगंज, इमामगंज, नबीगंज, आर्दश नगर, गुदड़ी, मासूमगंज (श्यामचक) सहित तीन दर्जन मुहल्ले के घरों में पाइपलाइन गैस पहुंचाई जाएगी। फिलहाल इन मुहल्लों के घरों में ही फिजिबिलिटी चेक कंपनी के कर्मी कर रहे है। पेट्रोलियम कंपनी आईओसी के वरिष्ठ प्रोजेक्ट मैनेजर अनीश कुमार बताते हैं कि आगामी वर्षों में दिघवारा, नयागांव, सोनपुर, अमनौर, भेल्दी में भी पाइपलाइन से घरों में गैस पहुंचाई जाएगी। सारण के बीजेपी सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी के प्रयासों के कारण ही महानगरों के तर्ज पर छोटे शहरों में भी पाइपलाइन से घरों में गैस की आपूर्ति की योजना संभव हो पाया। उनके इस प्रयास से सारण सहित बिहार के 24 जिला मुख्यालय वाले शहर लाभान्वित होंगे, ऐसा पेट्रोलियम कंपनी के अधिकारियों का भी मानना है।