महाभारत युद्ध का सबसे बड़ा कारण द्रौपदी थी, इस बात से आप कहां तक सहमत है? महाभारत में कदम-कदम पर पांडवों और कौरवों के बीच सत्ता के लिए और स्वयं को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए लडाई हुई। कई बार कौरवों ने पांडवों के साथ अत्याचार किए और अंत में अधर्म पर धर्म की विजय के लिए महाभारत युद्ध हुआ था।

द्रौपदी को समय-समय पर अपमान झेलना पड़ा। उसे पांच पतियों के बीच बांट दिया गया। पांडवों के साथ रहकर द्रौपदी ने अनेक कष्ट भोगे और उसे पूरे जीवन में कई बार नीचा दिखाया गया। भरी सभा में उसका वस्त्र हरण हुआ। यहां तक कि उसके पिता ने द्रोणाचार्य से बदला लेने हेतु ही उत्पन्न किया था। द्रौपदी का समस्त जीवन ही कष्टों से बंधा हुआ था और उसने केवल दुख ही झेले हैं।
ऐसे में यह कहना कि युद्ध का कारण द्रौपदी थी, यह बात अनुचित होगा। जिस व्यक्ति ने जन्म से मृत्यु तक केवल कष्ट झेले हों, वह महाभारत जैसे विशाल युद्ध का कारण नहीं बन सकती है। मामा शकुनि का छल, दुर्योधन का सत्ता का लालच, कौरवों का छल आदि भी इसके कई कारणो में से एक है।