यमुनानगर। हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने कहा कि अगर किसान गणतंत्र दिवस के विरोध की बात कर रहे हैं तो यह बात साफ हो जाती है कि इस आंदोलन के पीछे कम्युनिस्ट हैं। क्योंकि 26 जनवरी केवल बीजेपी का नहीं, देश का गौरव है और देश के गौरव से कम्युनिस्टों का कोई वास्ता नहीं है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि 1962 में भी जब लड़ाई लगी थी, तो कम्युनिस्ट बोल रहे थे कि बाहर से तो क्रांति आ गई अंदर से भी ले आओ। कम्युनिस्ट आज भी यह कहते है की चाइना ने जो भारत में कब्जा किया है वह ठीक है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत के साथ कन्धें से कंधा मिलाकर चलना चाहती है और कम्युनिस्टों से यह बात बर्दाश्त नहीं हो रही। इसलिए वह किसान को आगे कर बहकाने का काम कर रहे हैं।
  अभय चौटाला की इस्तीफा देने वाली धमकी पर चुटकी लेते हुए शिक्षा मंत्री गुर्जर ने कहा कि विधानसभा में वह अपनी पार्टी का इकलौता विधायक है। उसका अकेले दिल नहीं लग रहा होगा इसलिए यह फैसला लिया होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि कुछ लोग जो खुदको किसान नेता बता रहे है वह पार्षद और सरपंच के चुनाव भी नहीं जीत पाए और दावा कर रहे हैं कि कृषि कानून उनसे पूछकर बनाए जाए। शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने यह भी बताया कि कृषि कानून महिंदर सिंह टिकैत एवं चौधरी चरण सिंह से भी पहले से चली आ रही मांगो को ध्यान में रखकर 2001 से लेकर अब तक चले मंथन के बाद बनाए गए हैं। इसके लिए केंद्र व प्रदेश स्तरीय कमेटियां भी बनाई गई थी, जिसमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी सदस्य रहे हैं। 20 वर्षों के गहन सोच-विचार के बाद यह तीन कानून बनाए गए हैं। अगर फिर भी इन में कोई कमी लगती है तो बातचीत से उन्हें ठीक करवाया जा सकता है।