दूर-दूर तक फैली अरावली की पहाड़ियां कुंभलगढ़ आनेवालों का मन बरबस मोह लेती हैं. हर तरफ़ फैली हरियाली और टेशू के नारंगी फूलों से भरी वादियां हर पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. तो क्यों न शौर्य और ताकत की अनूठी मिसाल को देखने आप भी चलें कुंभलगढ़ की सैर पर.

कुंभलगढ़ का सबसे बड़ा आकर्षण है कुंभलगढ़ का किला. यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा और अजेय किला है. इस किले की 36 किलोमीटर तक फैली दीवार दुनिया की दूसरी सबसे लंबी  दीवार है. 2013 में यूनेस्को ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज की लिस्ट में शामिल कर लिया.
रणकपुर जैन मंदिरः भारतीय शिल्पकला का  अद्भुत नमूना
रणकपुर स्थित जैन मंदिर तीर्थंकर रिषभनाथ को समर्पित है. मार्बल से बने इस मंदिर में कुल 1444 खंभे हैं, जिन पर अलग-अलग नक्काशी की गई है. ऐसा माना जाता है कि कोई भी इन खंभों को आज तक गिन नहीं पाया है, क्योंकि जब भी कोई गिनती करता है, तो एक खंभा कम हो जाता है या फिर एक खंभा ज़्यादा. एक ही नंबर कभी नहीं आता. राणा कुंभा ने इस कस्बे और मंदिर को बनाने में मदद की थी, इसलिए इसका नाम उनके नाम से ही रणकपुर रखा गया.
इस मंदिर में आपको अद्भुत भारतीय शिल्पकला देखने का सुनहरा अवसर मिलता है. मंदिर के चार मुख्य द्वार हैं. मंदिर की छत में ठीक मूर्ति के सामने कल्पतरु का वृक्ष बनाया गया है. ऐसी मान्यता है कि इसके नीचे खड़े होकर मन्नत मांगने से भगवान वह मन्नत पूरी कर देते हैं. मन्नत पूरी होने पर लोग धन्यवाद देने यहां वापस ज़रूर आते हैं. यहां भगवान पार्श्‍वनाथ की एक मूर्ति के साथ सहस्त्रफना यानी 1008 सर्पों के सिर और शरीर बने हैं, जिनकी पूंछ ढूंढ़ने पर भी नहीं मिलती. देश-विदेश से हज़ारों की संख्या में यहां रोज़ाना पर्यटक आते हैं.
कुंभलगढ़ वाइल्डलाइफ सैंचुरी- रोमांचक जीप सफ़ारी
जंगली जानवरों को नज़दीक से देखने के रोमांच का अनुभव करना चाहते हैं, तो कुंभलगढ़ वाइल्डलाइफ सैंचुरी में जीप सफ़ारी का आनंद ज़रूर उठाएं. यहां आपको तेंदुआ से लेकर नील गाय, सांभर, लंगूर जैसे तमाम जंगली जानवर देखने को मिलेंगे. साथ ही आपको कई नए पक्षी भी देखने को मिल जाएंगे. यहां एक क्षेत्र ख़ासतौर से मोर का है, जहां आपको अनगिनत मोर नज़र आएंगे. जंगल सफ़ारी के दौरान आपको कई पेड़-पौधे और जड़ी-बूटियां भी देखने को मिलेंगी, जिनका स्थानीय लोग उपचार के लिए इस्तेमाल करते हैं. इस जंगल में आपको एक ख़ास पेड़ देखने को मिलेगा, जिसका नाम है- घोस्ट ट्री. जी हां, यह पेड़ एकदम स़फेद रंग का होता है, जो रात में चमकता है, इसीलिए इसे घोस्ट ट्री कहते हैं. यहां दिन में तीन सफ़ारी करवाई जाती है और नाइट सफ़ारी की भी व्यवस्था है. अगर आप ज़्यादा से ज़्यादा जानवरों को देखना चाहते हैं, तो सुबह की बजाय शाम के अंतिम शेड्यूल में सफ़ारी पर जाएं
हमेरपाल झील- अफ्रीकन कैटफिश देखने का रोमांच
कुंभलगढ़ के तलादरी गांव स्थित हमेरपाल झील में हज़ारों की संख्या में मौजूद अफ्रीकन कैटफिश यहां आनेवाले पर्यटकों को काफ़ी लुभाती हैं. इसे 13वीं शताब्दी में मेवाड़ के पहले महाराणा हमीर सिंह ने बनवाया था. कुंभलगढ़ किले को देखनेवाले पर्यटक यहां ज़रूर आते हैं. यहां मछलियां पकड़ने पर गांववालों ने पाबंदी लगा रखी है. यही वजह है कि मछलियों की तादाद बढ़ती जा रही है.

क्लब महिंद्रा: प्रकृति की गोद में शानदार आतिथ्य
अरावली की पर्वत शृंखलाओं से घिरे कुंभलगढ़ क्लब महिंद्रा रिज़ॉर्ट में आपको प्रकृति के स्पर्श का अनुभव होता है. इसके स्विमिंग पूल, फन ज़ोन, स्पा सेंटर और रेस्टोरेंट आपको बेस्ट क्वालिटी टाइम बिताने का मौक़ा देते हैं. यक़ीनन आप यहां से अविस्मरणीय यादें लेकर जाएंगे.