बूंदी। जिले से 25 किमी दूर बरूंधन गांव में मकर संक्रांति पर एक अनोखी परम्परा निभाई जाती है। यहां दो गांव के लोग एक दूसरे को दड़ा (व्‍यर्थ के कपड़ों से बनी फुटबॉल जैसी बड़ी गेंद) खेलने के लिए ललकारते हैं। दड़ा खेलने का क्रम सुबह से शुरू हो शाम तक चलता है। इस खेल में 40 किलो का दड़ा तैयार किया जाता है। ये खेल दो टीमों के बीच होता है। इसकी तैयारी एक महीने पहले से ही होने लग जाती है। राजपूत समाज और ग्रामीणों में बीच होने वाले इस खेल में युवा और बुजुर्ग, सब भाग लेते हैं और आपसी भाईचारे का परिचय देते हैं।
  इस खेल में खूब जोर आजमाइश होती है, लेकिन झगड़ा न कर आपसी सामंजस्य के साथ खेलते हैं। जब ये खेल चलता है तो लगता है कि गांव में फुटबॉल का वर्ल्ड कप हो रहा है। सभी लोग अपने घरों की छतों पर चढ़कर खेल देखकर आनंदित होते हैं और इस खेल का इतना हल्ला है कि आसपास के गांव के लोग भी इसे देखने आते हैं। प्राचीन समय से इसको खेलने की चली आ रही परंपरा को गांव के लोगों ने आज भी जीवित रखा है। 3 घंटे तक चलने वाले इस खेल को गांव वाले पूरा दिन खेलते हैं। इस बार दोनों टीमों के बीच खेला गया मैच टाई रहा। बताया जाता है कि राजाओं के समय राजपूत दरबार ने मकर संक्रांति के पर्व पर ग्रमीणों के साथ एक पहल की जिससे भाईचारा बना रहे। हाड़ौती का ये खेल और बरूंधन गांव की परम्परा आज भी उसी हर्षोल्लास से बनाई जाती है।