भगवान श्री कृष्ण ने अपने अत्याचारी मामा कंस का विनाश करने के लिए धरती पर अवतार लिया था। उन्होंने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में मथुरा में अवतार लिया था। यहां हम आपको उन छ: चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे भगवान श्री कृष्ण को बेहद प्रेम था। इनमें बांसुरी, माखन-मिश्री, गाय, कमल, मोर पंख शामिल हैं। इन सबके पीछे एक संदेश भी छुपा हुआ है।

गाय : भगवान श्री कृष्ण को गायों से बहुत ज्यादा प्रेम था, वह उन्हें अपने सखा मानते थे। गाय का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी बहुत ही उपयोगी है। इन पांचों को पंचगव्य कहते हैं। इन्हें शुद्ध माना गया है। गाय को सभी गुणों से सम्पन्न माना जाता है।

मिश्री : मिश्री भगवान श्री कृष्ण को बेहद पसंद है। वह बड़े ही चाव से मिश्री का सेवन करते थे। मिश्री को जब माखन में मिलाया जाता है तो यह उसके हर हिस्से में समा जाती है। मिश्री अच्छे से घुल-मिल जाने की सीख देती है।

बांसुरी : भगवान श्री कृष्ण को बांसुरी भी बेहद प्यारी थी। बताया जाता है कि बांसुरी में तीन गुण होते हैं, पहला यह है कि इसमें कोई गांठ नहीं होती, जो यह संकेत देती है कि अपने मन में किसी तरह का मैल या गांठ न रखें। दूसरा यह जब बजती है तो मीठी आवाज निकालती है, जो हमें बताती है कि कभी भी कड़वा बोल न बोलें, हमेशा मधुर वाणी ही बोलें। वहीं तीसरा है कि यह बिना बजाय बजती नहीं है। इसका मतलब हुआ कि जब तक कहा न जाए, तब तक न बोलें।

पवित्र कमल : कमल का फूल कीचड़ में खिलता है लेकिन वह उससे अलग ही रहता है। इस फूल को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। कमल से हमें पवित्र रहने की सीख मिलती है।

वैजयंती माला : भगवान श्री कृष्ण अपने गले में वैजयंती माला पहनते थे। यह माला कमल के बीजों से बनी हुई होती है। कमल के बीज न कभी सड़ते हैं और न ही टूटते हैं। उनकी चमक हमेशा बरकरार रहती है। इससे सीधा-सीधा संदेश मिलता है कि आप जिंदगी भर सदाबहार रहें।


मोर पंख से प्रेम : भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख भी पसंद था। वह प्रेम में ब्रह्मचर्य की भावना को समाहित करने के प्रतीक के रूप में मोर पंख धारण करते थे।